Sunday, December 28, 2008

मेरी चाहत

मेरी चाहत ने उसे खुशी दे दी,
बदले में उसने हमें खामोशी दे दी,
खुदा से दुआ मांगी मरने की,
मगर उसने तड़पने के लिए ये जिंदगी दे दी।

6 comments:

Unknown said...

bhai bahut achcha shayar hai!
dhanyvad!

रचना गौड़ ’भारती’ said...

ये शेर नही सवा सेर है
कलम से जोड्कर भाव अपने
ये कौनसा समंदर बनाया है
बूंद-बूंद की अभिव्यक्ति ने
सुंदर रचना संसार बनाया है
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com

Prakash Badal said...

अच्छा लगा आपका शेर पढ़कर आपका स्वागत है।

हें प्रभु यह तेरापंथ said...

*VERY GOOD






PLEASE VISIT MY BLOG...........
"HEY PRABHU YEH TERAPANTH "

अभिषेक मिश्र said...

बहुत खूब. स्वागत ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी.

Jack Broun said...

Welcome to all visitors in my blog www.yadokasafar.blogspot.com
:-)